मेरे अंदर की लड़की

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newalive24x7Kanta

हरी-भरी धरा पर
मुस्कुराते फूल,बरसते बादल
और कल-कल बहती
नदियों को देखकरGirl
नाचती है मेरे अंदर की लड़की

कभी वहशीपन,कभी दहेज़ के लिए
इंसानियत को भूलते
रिश्तों को देख
पिता के माथे पर
चिन्ता की लकीर
बनती है मेरे अंदर की लड़की

अनंत आकाश में
उड़ने को आतुर
पंख कतरी चिड़िया को देख
गर्म रेत पर पड़ी मछली सी
तड़पती है मेरे अंदर की लड़की

मन के ओनो-कोनों को
अहसासों की बारिश में भिगोकर
सिमट जाती हूँ
जब स्नेह-पाश में
मौन पड़े शब्दों को तब
तलाशती है मेरे अंदर की लड़की

  • कान्ता घिल्डियाल

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